लखनऊ विश्वविद्यालय तथा NTA NET के पाठ्यक्रम में लगी समस्त कविताओं का वाचन आपको यहाँ मिलेगा।
आप बार बार सुनेंगे तो यह कविताएँ अनायास ही आपको याद हो जाएँगी।
सुनते समय पाठ अपने सामने रखें। हो सके तो साथ साथ दोहराएं। आप का अनुभव अच्छा हो इसी आशा के साथ
22 Oct 2022
कुरुक्षेत्र
षष्ठ सर्ग
19 Jan 2021
आओ मिलकर बचाएं
आओ मिलकर बचाएँ
अपनी बस्तियों की
नंगी होने से
शहर की आबो-हवा से बचाएँ उसे
बचाएँ डूबने से
पूरी की पूरी बस्ती को
हड़िया में
अपने चेहरे पर
संथाल परगना की माटी का रंग
भाषा में झारखंडीपन
ठंडी होती दिनचर्या में
जीवन की गर्माहट
मन का हरापन
भोलापन दिल का
अक्खड़पन, जुझारूपन भी
भीतर की आग
धनुष की डोरी
तीर का नुकीलापन
कुल्हाड़ी की धार
जगंल की ताजा हवा
नदियों की निर्मलता
पहाड़ों का मौन
गीतों की धुन
मिट्टी का सोंधापन
नाचने के लिए खुला आँगन
गाने के लिए गीत
हँसने के लिए थोड़ी-सी खिलखिलाहट
रोने के लिए मुट्ठी भर एकांत
बच्चों के लिए मैदान
पशुओं के लिए हरी-हरी घास
बूढ़ों के लिए पहाड़ों की शांति
फसलों की लहलहाहट
और इस अविश्वास-भरे दौर में
थोड़ा-सा विश्वास
थोड़ी-सी उम्मीद
थोडे़-से सपने
आओ, मिलकर बचाएँ
कि इस दौर में भी बचाने को
बहुत कुछ बचा है
अब भी हमारे पास
17 Sept 2020
साना साना हाथ जोड़ि
साना साना हाथ जोड़ि मधु कांकरिया के द्वारा सिक्किम यात्रा पर लिखा गया यात्रा वृतांत है। अपनी सिक्किम यात्रा के दौरान हुए सभी खट्टे मीठे अनुभवों को वे साझा करती हैं। पूरे यात्रा वृतांत में एक ज़िम्मेदार लेखिका का सजग व्यक्तित्व झाँकता रहता है।
11 Aug 2020
जार्ज पंचम की नाक
लेखक बताता है कि बहुत समय पहले की बात है एलिजाबेथ द्वितीय के भारत आने की चारों तरफ चर्चा थी। दरजी पोशाकों को लेकर परेशान था कि रानी कहाँ क्या पहनेंगी। गुप्तचरों का पहले अंदेशा था कि तहकीकात कर ली जाय । नया जमाना था सो फोटोग्राफरों की फौज तैयार थी। इंग्लैंड के अखबारों की कतरने भारतीय अखबारों में छब रही थीं। सुनने में आया कि रानी के लिए चार सौ पौंड का हल्का नीला सूट बनवाया गया है जो भारत से मंगवाया गया था। रानी एलिजाबेथ की जन्मपत्री और फिलिप के कारनामें छापे गए। लेखक व्यग्य करते हुए कहता है कि अंगरक्षकों, रसोइयों की तो क्या एलिजाबेथ के कुत्तों तक की जीवनियाँ अखबारों में छप गई।
इन दिनों इंग्लैंड की हर खबर भारत में तुरंत आ रही थी। दिल्ली में विचार हो रहा था कि जो इतना महंगा सूट पहन कर आएगी, उनका स्वागत कितना भव्य करना पड़ेगा। किसी के बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुने राजधानी सुन्दर, स्वच्छ तथा इमारते सुंदरियों सी सज गई लेखक आगे बताता है कि दिल्ली में किसी चीज की कमी नहीं थी एक चीज को छोड़कर और वह थी लाट से गायब जॉर्ज पंचम की नाक।
लेखक कहता है कि इस नाक के लिए कई दिन आन्दोलन चले थे। कुछ कहते थे कि नाक रहने दी जाए, कुछ हटाने के पक्ष में थे। नाक रखने वाले रात दिन पहरे दे रहे थे। हटाने वाले ताक में थे। लेखक कहता है कि भारत में जगह-जगह ऐसी नाकें थीं और उन्हें हटा-हटा कर अजायबघर पहुंचा दिया गया था। कहीं-कहीं इन शाही नाकों के लिए छापामार युद्ध की स्थिति बन गई थी।
लेखक कहता है कि लाख चौकसी के बावजूद इंडिया गेट के सामने वाले खम्भे से जॉर्ज पंचम की नाक चली गई और रानी पति के राज्य में आए और राजा की नाक न पाए तो इससे बड़ी व्यथा क्या हो सकती है। सभाएँ बुलाई गई, मंत्रणा हुई कि जार्ज की नाक इज्जत का सवाल है। इस अति आवश्यक कार्य के लिए मूर्तिकार को सर्वसम्मति से यह कार्य सौंप दिया गया। मूर्तिकार ने कहा कि नाक तो बन जाएगी पर ऐसा पत्थर लाना होगा।
सभी नेताओं ने पत्थर लाने की बात पर एक दूसरे को ऐसे ताका जैसे यह कार्य अपने से दूसरे पर थोप रहे हों। फिर इस सवाल का हल क्लर्क को सौंप कर हो गया। क्लर्क ने पुरातत्व विभाग की फाइलें चैक की। कुछ हासिल न होने पर काँपते हुए समिति से माफी मांग ली। सबके चेहरे उतर गए। अब एक और कमेटी तैयार करके यह काम उसे हर हालत में करने का आदेश दिया गया। दूसरी समिति ने फिर मूर्तिकार को बुलाया और मूर्तिकार ने कहा कि भारत में क्या चीज है जो नहीं मिलती। वह हर हाल में यह काम करेगा चाहे पूरा भारत खोजना पड़े। उसकी मेहनत का भाषण तुरंत अखबार में छप गया।
मूर्तिकार ऐसे पत्थर की खोज करने गया जिससे लाट पर मूर्ति बनी थी परन्तु उसने निराशाजनक जवाब देते हुए कहा कि नाक विदेशी पत्थर की बनी है। सभापति ने क्रोधित होकर कहा कि कितने बेइज्जती की बात हैं कि भारतीय संस्कृति ने पाश्चात्य संस्कृति पूरी तरह अपना ली। फिर भी पत्थर नहीं मिला। उदास मूर्तिकार अचानक चहककर बोला कि उपाय एक है लेकिन अखबार वालों तक न पहुँचे। सभापति खुश हुआ। चपरासी ने गुप्त वार्ता के लिए सारे दरवाजे बंद कर दिए। मूर्तिकार झिझकते हुए बोला कि अगर इजाजत हो तो अपने नेताओं की किसी मूर्ति की नाक उतार कर इस पर लगा दी जाएगी। कुछ झिझक के बाद सभापति ने खुशी से स्वीकृति देते हुए इस कार्य को बड़ी होशियारी से अंजाम देने को कहा।
लेखक कहता है कि नाक के लिए मूर्तिकार फिर यात्रा पर चल दिया। वह दिल्ली से बम्बई गया, गुजरात और बंगाल गया. यूपी., मद्रास, मैसूर, केरल आदि पूरे भारत के चप्पे-चप्पे में गया परन्तु सब प्रतिष्ठित देशभक्त नेताओं की नाक जार्ज की नाक से लम्बी थी। यह जवाब पाकर सब फिर क्रोधित हुए। मूर्तिकार ने ढांढस बँधाते हुए कहा कि सन् बयालिस में शहीद हुए बच्चों की नाक शायद ऐसी मिल जाए। परन्तु दुर्भाग्य बच्चों की नाक भी जॉर्ज की नाक से बड़ी थी। मूर्तिकार ने फिर निराश होते हुये जवाब दे दिया।
दिल्ली की तमाम तैयारियां पूरी हो गई परन्तु नेता नाक के लिए परेशान थे। मूर्तिकार पैसों का लालच नहीं छोड़ पा रहा था। उसने एक और उपाय सुझाया कि चालिस करोड़ जनता में से किसी का तो नाक नाप का मिलेगा और इसके लिए आप परेशान न हो क्योंकि नाक की जिम्मेदारी उसकी है। कानाफूसी के बाद उसे इजाजत दे दी गई।
लेखक बताता है कि दूसरे दिन अखबार में सिर्फ इतना छपा कि जॉर्ज को जिंदा नाक लगाई गई है। नाक से पहले हथियार बंद सैनिक तैनात किए गए। तालाब को साफ कर ताजा पानी भरा गया ताकि जिन्दा नाक सूखे नहीं। मूर्तिकार स्वयं अपने बताए हल से परेशान कुछ और समय माँग रहा था। उसने हिदायत अनुसार नाक लगा दी। लेकिन उस दिन अखबार में कोई खबर नहीं आई। न फीता कटा और न उद्घाटन कर कुछ स्वागत समारोह नहीं हुआ। लेखक कहता है कि एक ही तो नाक चाहिए थी फिर इतना
22 Jul 2020
क़ैदी और कोकिला
माखनलाल चतुर्वेदी
8 Jul 2020
सवैये 2
Ix
7 Jul 2020
माता का अंचल(प्रश्नोत्तर)
कक्षा 10
4 Jul 2020
माता का अंचल
10
4 Jul 2020
देव
कक्षा 10
4 Jul 2020
रसखान के सवैये
कक्षा 9
4 Jul 2020
कुँवर नारायण #12
यहाँ पर कुँवर नारायण की दो कविताओं का सस्वर पाठ तथा संक्षिप्त व्याख्या दी गई है।
11 Apr 2020
बालगोबिन भगत(रामवृक्ष बेनीपुरी)
This is model reading of the lesson.it can be used for listening lesson.
11 Apr 2020
नेताजी का चश्मा (स्वयं प्रकाश)। NCERT HINDI CLASS X
This audio is for class X students of CBSE BOARD who have choosen Hindi course A. This audio can be beneficial for them for improving reading skill. They can read along.
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