ANTAS Salutes Corona Warriors (कोरोना योद्धाओं को नमन )
This poem is a dedictaion to all The Corona warriors from the Antas .
17 May 2020
Poorv Chalne Ke Batohi, पूर्व चलने के बटोही - हरिवंश राय बच्चन ,काव्यकलश
This poem is written by Harivansh Rai Bacchan Ji , A great Hindi Poet .
14 May 2020
World Family Day Special _ Parivar - Ek chota Sa Sansaar {परिवार - एक छोटा सा संसार}
World Family Day Special _ Parivar - Ek chota Sa Sansaar {परिवार - एक छोटा सा संसार} is a Hindi Poetry specially deducted to my family which is like a small world in this world .
14 May 2020
Kavykalsh Intro
Intro
8 May 2020
Lockdown Special - Corona Warriors कोरोना योद्धा
This is a Hindi Poetry dedicated to all the corona warriors who are saving our lives . Thank You All The corona Warriors . ये एक हिंदी कविता है उन सभी कोरोना योद्धाओं के लिए समर्पित जो स्वयं खड़े हैं हमे बचाने के लिए , धन्यवाद आप सभी का Youtube पर Serach करे अंतस
7 May 2020
Mother's Day Special - Humne Suna Hai (हमने सुना हैं )
हमने सुना हैं कि सबने एक दिन चुना हैं
दिन चुना हैं उस के लिए जिसने पल पल करके हमारा जीवन बुना हैं
दिन चुना हैं उसके लिए जिसकी धड़कन को हमने हमारे दिल से पहले सुना हैं
दिन चुना हैं उसके लिए जिसके मुँह से खुद के लिए बस ... लल्ला राजा बेटा मेरा प्यारा पूत सुना हैं
कभी कभी वो गुस्से में हमको डाँट भी लगाती हैं
पर वही तो हैं जो बिना कहे हमारे पेट की भूख को जान पाती हैं
वही तो हैं जो गलत करने पर समझाती हैं
और कुछ सही कर दिया गलती से तो मारे ख़ुशी के सारे जहाँ में बताती हैं
वो है जो छोटे अ से अनार पढ़ाती थी
वो हैं जो गिनती, पहाड़े, ABCD सिखाती थी
वो है जो गुल्लक में पैसे जोड़ने सिखाती थी
वो है जो सफ़ेद शर्ट पर पिन से रूमाल लगाती थी
वो हैं जो स्कूल के लिए जल्दी उठाती थी
सूरज से भी जल्दी उठ कर हम सब के लिए टिफिन बनाती थी
वो हैं जो हम सब का होम वर्क कराती थी
वो हैं जो परीक्षा से पहले दही चीनी खिलाती थी
वो हैं जो एक होते हुए भी हज़ारो रूप निभाती थी
वो निभा रही है वो निभाएगी
जिसने तुम्हे जन्म दिया वो तुम्हे आगे भी बढ़ाएगी
बस बदले में वो तुमसे थोड़ा प्यार ही तो चाहेगी
ज़िन्दगी में तुम चाहे कितने भी बड़े क्यों न हो जाओ
पर एक माँ ही तो है जो हर बार तुम्हे एक बच्चे सा ही चाहेगी
तो कभी भी माँ से बड़े बनने की कोशिश न करे ... 😊
29 Apr 2020
Lockdown Special - घर मे बन्द रहना कैसा होता है (Ghar mein band rehna kaisa hota hain)
तुम पहली बार रहे हो शायद , मैं तो हमेशा से ही बन्द में थी
तुम लोगों के बीच , बाजार में , भीड़ के शोर में
मैं घर पर, घर के कामो से घिरी अकेली थी , अपने ही द्वन्द में थी
अब जब तुम भी हो इस बन्द में , क्या कुछ देखा ऐसा जो मैं कर पाती हूँ
या अब भी यही सोचते हो कि मैं करती ही क्या हूँ ,मैं तो बस घर चलाती हूँ
घर चलाना आसान है क्या , बताओ तो जरा
तुमसे पहले जागती हूँ , सबके सोने के बाद सो पाती हूँ
दिन भर भागती हूँ ,पर फिर भी खुद को घर मे ही पाती हूँ
तुम्हे पहले कभी दिखी न थी जो
हम घर की औरतों के लिए ,
थी पहले भी रेखा वो
आज तुम भी बन्द हो इस रेखा के भीतर ही
तो तुम्हे झटपटाहट हो रही है
आज मौका है , जान लो कि घर पर रहना कैसा होता है
दिन भर चलना पर कहीं पहुँच न पाना कैसा होता हैं
कैसा होता है काम करना , और काम का पहचाना न जाना कैसा होता हैं
सुनकर ये सब बोला आदमी
हाँ घुटन है मुझे
मैं झटपटा रहा हूँ
क्योंकि मैंने हमेशा खुले आसमान में
धूप के नीचे जिया है जीवन
शायद कारण है यही
कि छत के नीचे सुकून नही पा रहा हूँ
मुझे फ़िक्र है कि गर ये यूँ ही बढ़ता गया तो कब तक कमाए बिना खा सकते हैं हम
गर ये बन्द ही न हुआ तो घर पर रहे रहे कितने दिन बिता सकते हैं हम
इस चैत्र वैशाख के मौसम में आदत है मेरे शरीर को
बसन्त के बाद उन गर्म हवाओं की
उस से आने वाले पसीने की
वो अब नही है ,
इसीलिए इतना परेशान हूँ मैं
मैं समाज मे रहता हूँ , लोगो के बीच जाता हूँ
कुछ उनकी सुनता हूँ , कुछ अपनी सुनाता हूँ
यूँ घर मे बन्द रहना परेशान कर रहा है मुझे
मुझे नही आदत अपने ही अपनो के बीच बहुत ज़्यादा रहने की
उन अपनो के बीच जिनके सपने , ख़्वाब , ख्वाहिशें और जरूरत को पूरा करने के लिए
उन्हीं अपनो से दूर रहता हूँ मैं दिन के बहुत बड़े समय तक
शाम को घर आता हूँ तब भी थका हारा , औऱ आकर सो जाना - यही तो करते आया हूँ बहुत समय से
औऱ जानता हूँ कि बहुत समय तक नही रह पाउँगा मैं तुम सबके साथ इस तरह तो क्यों अपनी आदत को बिगाड़ लूँ इस थोड़े से समय मे
शायद इसीलिए परेशान हूँ मैं
, घुटन है मुझे , झटपटा रहा हूँ मैं
23 Apr 2020
हमने सुना है , Humne suna hai
हमने सुना हैं कि सबने एक दिन चुना हैं
दिन चुना हैं उस के लिए जिसने पल पल करके हमारा जीवन बुना हैं
दिन चुना हैं उसके लिए जिसकी धड़कन को हमने हमारे दिल से पहले सुना हैं
दिन चुना हैं उसके लिए जिसके मुँह से खुद के लिए बस ... लल्ला राजा बेटा मेरा प्यारा पूत सुना हैं
कभी कभी वो गुस्से में हमको डाँट भी लगाती हैं
पर वही तो हैं जो बिना कहे हमारे पेट की भूख को जान पाती हैं
वही तो हैं जो गलत करने पर समझाती हैं
और कुछ सही कर दिया गलती से तो मारे ख़ुशी के सारे जहाँ में बताती हैं
वो है जो छोटे अ से अनार पढ़ाती थी
वो हैं जो गिनती, पहाड़े, ABCD सिखाती थी
वो है जो गुल्लक में पैसे जोड़ने सिखाती थी
वो है जो सफ़ेद शर्ट पर पिन से रूमाल लगाती थी
वो हैं जो स्कूल के लिए जल्दी उठाती थी
सूरज से भी जल्दी उठ कर हम सब के लिए टिफिन बनाती थी
वो हैं जो हम सब का होम वर्क कराती थी
वो हैं जो परीक्षा से पहले दही चीनी खिलाती थी
वो हैं जो एक होते हुए भी हज़ारो रूप निभाती थी
वो निभा रही है वो निभाएगी
जिसने तुम्हे जन्म दिया वो तुम्हे आगे भी बढ़ाएगी
बस बदले में वो तुमसे थोड़ा प्यार ही तो चाहेगी
ज़िन्दगी में तुम चाहे कितने भी बड़े क्यों न हो जाओ
पर एक माँ ही तो है जो हर बार तुम्हे एक बच्चे सा ही चाहेगी
तो कभी भी माँ से बड़े बनने की कोशिश न करे ... 😊
23 Apr 2020
वो बूढ़े हो रहे हैं ,Wo budhe ho rha hai
जैसे जैसे तुम बड़े हो रहे हो
वो जिन्होंने तुम्हे बड़ा किया
वो बूढ़े हो रहे है
उनका ख्याल रखना
अपने पैरों पर तुम तो खड़े हो रहे हो
पर वो जिन्होंने गिरते क़दमो को खड़ा किया
वो बूढ़े हो रहे हैं
उनके घुटनो के दर्द का हाल चाल रखना
वो जिन्होंने बचपन में हर छोटी बड़ी जिद को
माना तुम्हारी , पूरा किया हर ख़्वाहिश को
वो गर अपने बुढ़ापे में कुछ मांगे तुमसे
तो कुछ कम सामने उनके जवाब सवाल रखना
उनकी पुरानी फोटो , पूजा की किताबें , हिसाब की डायरी , एक अलमारी में सब संभाल रखना
खाना खाया कि नही , दवाई तो नही आनी और कुछ एक ऐसे सवाल रखना
वो जो तुम्हे हाथ पकड़ लिखना सिखाएं उन्हें Phone चलाना तुमको हैं सिखाना
वो जो तुम्हे Train पर पहली बार ले कर गए थे , उन्हें हवाई जहाज में तुम्हे ही हैं बिठाना
जिन्होंने तुमको Water Park दिखाया , कभी तुम भी उन्हें गंगा मैया दिखा लाना
जिन्होंने तुमको दुनिया घुमा दी , उनकी दुनिया तुमसे हैं ये मत भूल जाना
अपने बचपन से ज्यादा जिन्होंने जिया तुम्हारा बचपन ,
उनके बुढ़ापे में उन पर अपना बढ़ापन न दिखाना
वो तुम्हारे बच्चे होने पर बच्चे बन गए थे तुम उनके बूढ़े होने पर उनसे बड़े न हो जाना
वो बुजुर्ग हैं , कभी कभार थोड़े चिड़चिड़े भी हो जायेंगे ,
बस अपने बचपन की बचकानी हरकतों को यादो में ले आना ,
यादो में लाना वो जब तुम बिस्तर पर पेशाब कर दिया करते थे ,
वो जब तुम चार साल का होने पर भी गोद में चढ़ने की जिद किया करते थे
और वो जब दूध पीने कोई बोलता था तुम गुस्सा हुआ करते थे
उन्होंने तुम्हारे लिए वो सब झेला है ,
कभी तुम्हारे कहने पर बने घोड़ा और तुम्हारे संग हर खेल भी खेला हैं
आज गर बुढ़ापे में वो कभी परेशान दिखे तो , खेल तो वो नही खेल पाएँगे पर हाँ तुम्हारे साथ की बातों में बहुत सुकून पाएंगे
तो यूँ ही कभी उनके पास बैठ कर बस बात किया करो
क्या हुआ दिन में नया , अच्छा या बुरा बस उनसे कहा करो
23 Apr 2020
पिता जैसे छत है
पिता जैसे छत हैं
पिता धूप में जैसे छाया हैं
नाम के साथ जो लगा है वो पिता से ही पाया हैं
पिता अनुशासन हैं
पिता सीख हैं
जो खड़े हो पेड़ की तरह तुम आज
पिता उसकी जड़ हैं
पिता से ही उसका बीज हैं
पिता जैसे शक्ति हैं
पिता से बल भी हैं
पिता से था बीता जो... पिता आज हैं
पिता से कल भी है ,
पिता बंद किताब हैं
खुलती नही आसानी से पर सीखने को उसमे बेहिसाब हैं
पिता जूतों की पिटाई हैं पिता डंडे की मार हैं
जिसे मिला पिता से ये ..जीवन नैया उसकी पार हैं
पिता आँखों आँखों में ही डाँट हैं
पिता हैं तो मेले हैं , झूले हैं , पूडी कचौरी और चाट हैं
पिता जैसे तजुर्बों से भरा कोई सन्दूक हैं
पिता से ही गेंद हैं , खेल हैं ,खिलौने है बन्दूक हैं
पिता हैं जैसे 32 इंच की साइकिल पर ही हवाई जहाज हैं
पिता से स्कूल में दाखिला हैं , बस्ता हैं कॉपी हैं किताब हैं
पिता हैं जैसे यादो से भरी कोई अलमारी है
पिता हैं तो बाज़ार हैं और बाज़ार में एक दुकान हमारी हैं
पिता से ही पेट में खाना हैं
मजे से खेलना और चादर तान सो जाना हैं
माँ हैं तो खाना पक पाना हैं
पर पिता के होने से पकाने के लिए दाना हैं
माँ हैं तो बनता मकान एक घर है
पर बनता पहले मकान पिता के होने पर हैं
पिता हैं जैसे डोर बंधी उड़ती किसी पतंग से न कि कोई जंजीर है
पिता हैं जो खुद लेगा आलू और तरकारी पर आपकी थाली में पनीर हैं
पिता है वो की गर बरसात हो और एक ही हो छाता भीग लेगा वो खुद पर तुम्हे है बचाता
13 Apr 2020
जलियांवाला बाग - साल था 1919 का
This is a poem about the Jaliyanwala bagh , in which thousands of indians were shot dead
12 Apr 2020
मैं हर उस बार कुछ बदल सा जाता हूँ
"Main Har Us Baar Kuch Badal Sa Jaata Hun" is a Hindi Poem
11 Apr 2020
हम आदमी हैं
"Hum Aadmi hain" is a Hindi Poem about the men , this poem tells about men how it is different from being a women in India .
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