वक़्त सबसे बड़ा मरहम है,
बचपन से सुनती आई हूँ पर
ये वक़्त दर्द में इतना रुका सा क्यूँ
प्रतीत होता है
तेरे संग बीते वो प्यारे पल
कितनी जल्दी यादों में
तब्दील हो गए
तब पकड़ने की कोशिश भी तो नही करती थी
हर अगले पल का बेसब्री से इन्तज़ार करती थी और बस यूँ ही सारे पल मुट्ठी से फिसल गए और अब तेरे चले जाने का ये दर्द ….
जानती हूँ निकल ही जायेगा ये वक़्त भी ….कुछ भी तो कायम नही रहता यहाँ पे
मगर ये वक़्त दर्द में इतना रुका सा क्यूँ लगता हैं
... सुमन
14 Nov 2022
ओशो धारा
ओशो धारा की ध्यान गीता से... सम्यक कर्म
9 Nov 2022
विपरित
विपरित हमेशा ही इक दूसरे को
आकर्षित करता है
और वो साथ ही रहते हैं
चुंबक के दो ध्रुव के बारे मे
सब जानते है इसलिए मानते भी है
जीवन के साथ हर पल मृत्यु भी है
दिन है तो रात भी है ...
उजाला है तो अंधेरा होगा ही
सुख हमेशा दुःख का साथी है
मित्र और शत्रु, स्त्री और पुरुष भी
मिलन और बिछोह, नदी के किनारे भी,
बस मन मानना नहीं चाहता
इंसान जन्म चाहता है मृत्यु नहीं
मिलन चाहता है वियोग नहीं
मगर सच तो इससे उल्टा है
इक के साथ दूसरा सतत घट रहा है
ये दिखते विपरित है मगर
हैं तो ये इक दूसरे के पूरक ही
इक के बिना दूसरे का कोई
अस्तित्व नहीं ...सुमन
2 Nov 2022
मन
नमस्कार दोस्तों
मैं सुमन राकेश शाह( Ruhaani poetry) आज फिर आपके साथ हूँ मेरी आवाज़ मेरे अल्फाज़ में और आज मैं बात करुँगी "मन" की … आज मन नहीं है, आज मेरा मन उदास है, आज मन नाच रहा है किसी ज्ञानी ने तो ये भी कहा है कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत…. तो आज हम उसी मन की बात करेंगे
मैने अपने दिल को ही
सवालों के कटघरे में खडा कर दिया
क्योंकि थक चुकी हूँ उसकी मनमर्ज़ी से
कभी तो सुने ये दिमाग की,
दिमाग अपने अनुभव से कुछ कहता है
और ये दिल चोट खाकर भी पिघल जाता है
स्थिर रहना गलत नही है,
मजबूत बनना और दिखना दोनो ही
वक़्त और हालात होते है
जिन्हे सभी को स्वीकारना होता है...सुमन
अनगिनत इच्छायें मन की,
अंधे कुँए सी, जितनी पूरी करो
नई सर उठाती है, फिर भी..
मन की खुशी कहाँ मिल पाती है
देर हो उससे पहले जागना होगा
इस आब ए सराब को समझना होगा..सुमन
जब जो चाहा, पाया मगर फिर भी
ख्वाहिशों की फहरिस्त कम न हुई ..… सुमन
जिन्दगी मे हमेशा ही कुछ अधूरा रहा
जब अपने अंतर में झाँका तो
वहाँ खुद को मुक़म्मल ही पाया… सुमन
बात नही करनी तो
कुछ नही, बस ज़रा सा मुस्कुरा दो
सुना है इक हल्की मुस्कान से
रिश्तें और दिल चटकने से बच जाते है..सुमन
हार के पीछे जो संघर्ष
और सबक छुपा है वहीं
तुम्हारी जीत का आगाज़ है
..… सुमन
31 Oct 2022
बेबस मोहब्बत
हैलो दोस्तों मैं सुमन राकेश शाह इक लंबे अंतराल के बाद इक बार फिर हूँ आपके साथ, बेशक आप सभी ने दिवाली की छुट्टियों का आनंद लिया होगा मेरी शुभकामना है कि आपका नया इसी तरह हंसी खुशी बीते…
कल मैंने इक पुरानी movie देखी थी केदारनाथ,
इतनी लाचार मोहब्बत देख के सोचने लगी …कि
सरहदें और धर्म तो इंसानों ने बनाए
और प्रेम ईश्वर का आशीर्वाद
फिर भी न जाने क्यूँ हर बार,
ईश्वर को इंसान से हारना पड़ता है ...सुमन
और उसी पर कुछ लिखा है
कैसी लाचार मुहब्बत है, ना पंख है, ना जुबां
न स्वछंद आसमां में उड़ती, न मैदानों में दौडती है
अकेले ऊंचे पहाड़ों में गूंजकर लौट आती है
फिर वहीं उनके पास, सुनने वाला कोई भी नही
ये पहाड़ गवाह बने मगर हमेशा खामोश ही रहे
सैकड़ों सालों से मंज़िल की तलाश में भटकती
मुहब्बत को छुआ था इन्हीं हवाओं ने,
नदी, पहाड़, फ़िजा सब वहीं थे ज्यों के त्यों
बनते रहे है बेबस मुहब्बत के गवाह
कितने ही सुलगते अरमान समा गए इनमें
मगर ये खामोश खड़े है अचल, बहते रहे है अविरल
और बेबस मुहब्बत हार के दम तोड़ देती हैं
या खामोशी में घुट के जी लेती है ..सुमन
27 Sept 2022
बादलों की हसीन दुनिया
आज कुछ बच्चो के लिये लेकर आई हूँ और बच्चे ही क्यूँ हम बड़ों को भी बादलों की दुनिया हमेशा लुभाती है ना…तो …आज चलो मेरे साथ बादलों की दुनिया की सैर कर आते
मै पहुँची आज बादलों की अज़ब दुनिया में
बादलों की सड़कें थी, बादलों के ही थे पहाड़
रुई सी नरम थी वो बादलों की सफ़ेद दुनिया
गम ए ज़िन्दगी कितने छोटे हो गए वहां
परियों की छोटी सी दुनिया थी
जो सपनों की दुनिया दिखा कर मुझे
बचपन की कहानियां याद दिला गयी
मै खेलती, उड़ती.... दौड़ रही थी
एक खरगोश, एक हिरन के संग
एक बादल से ..दूसरे बादल को फांद रही थी
इस सफ़ेद, नीली सी दुनिया के
ख्यालों में डूबती - उतरती सी घूम रही थी
तभी एक काले बादल ने.. रास्ता मेरा रोक दिया
नन्हा सा ये दिल मेरा ...मानो धड़कना ही भूल गया
मै घबरायी, पैर फिसल गया और मैं गिर पड़ी नीचे
गिरते गिरते पहुँच गयी फिर अपनी दुनिया में
अपनों के बीच,... खुद पे ही हंस पडी
मेरी अपनी दुनिया भी कुछ... बुरी तो नहीं .... सुमन
24 Sept 2022
आपकी मुस्कान ढूँढ लाएं
आज लगता है वो फिर अपनी
मुस्कान घर लाना भूल गए
बच्चों से कहा, देखो!!
कहीं कार में न भूले हो
जा के देख आओ
ऑफिस में भूले होंगे तो मिल भी जायेगी
मगर , कहीं रास्ते में न गिर पड़ी हो
आज लगता है वो फिर अपनी
मुस्कान घर लाना भूल गए
हंसी के बिना आपका
उदास चेहरा अच्छा नहीं लगता
बच्चों पे किया गुस्सा
मम्मी पापा को भी नाराज़ कर जाता है
हम सब को आपसे प्यार है इसलिए
चलो न! ढूंढ लाते है आपकी मुस्कान
शायद कहीं आइसक्रीम में छुपी होगी
या पुराने दोस्तों के पास रखी हो
चलो आज कहीं घूम आएं
आपकी मुस्कान ढूंढ लाते है...सुमन
22 Sept 2022
तुम्हारे बिना
दोस्तो मैं सुमन राकेश शाह इक बार फिर आपके साथ हूँ meri आवाज, मेरे अल्फाज़ में…और आज लेकर आई हूँ "तुम्हारे बिन"
2020 में जब कोरोना आया था तब डरे सहमे घरों में सुरक्षित थे हम मगर इन तीन सालों में हमने कितने अपनों को खोया है और वो भी all of sudden.… और अब तक वहीं सिलसिला चल रहा है,
उसी भाव के साथ कुछ पंक्तिया लिखी है
तुम्हारे बिना सब ज्यों का त्यों है
फिर ये दिल इतना उदास क्यों है
दुनिया तो वही की वही फिर
ये सूना सूना सा हमारा जहां क्यूं है,
चाहते है हँसना खिलखिलाना फिर से
मगर दिल की ये बंदिशे क्या है,
यादें तुम्हारी दिल मे बसा के
चलना जरा मुश्किल है
साथ वो घड़ी भर का था
मगर यादें अनंत है
जानतें तो हम भी है कि
इक दिन चले ही जाना है सब को
फिर ये दिल इतना उदास क्यूं है ।
तुम्हारे बिना ये जग सूना सूना क्यूं है...सुमन
21 Sept 2022
This poem is described a woman, poet and artist's feeling ....what they look and what they feel
स्त्री(कवियित्री)अक्सर दो दुनिया में जीती है
इक दुनिया दहलीज के भीतर,
समाज व परिवार के दायरों में
खुद को भूली सी, बाहर बिखरी सी
खुश दिखती है जैसे सारे जहां की
खुशियों उसके कदमों में पड़ी है
झुकी नजर, खामोश जुबान,
सब कुछ स्वीकारती सी मुस्कान
मगर एकांत में
वो इक अलग दुनिया में पहुंच जाती है
भीतर की दुनिया
खुद की गहराइयों में उतरती है
डूबती है, उबरती है,
बारिश की कुछ बूंदे चेहरे पर महसूस करती है
पहली बारिश और मिट्टी की खुशबू
में वो खो जाती है
कभी वो हवा के साथ उड़ती है
कभी नदी के साथ बहती है
कभी जब फूलों की खुशबू से महक जाती है
कभी अकेले चांद को देखती है
मगर ये सब तो बहाने है
भीतर की दुनिया में उतरने के
फिर लौट आती है उस दुनिया में
जहाँ खुश दिखती है वो
जैसे सारे जहां की
खुशियों उसके कदमों में पड़ी है ..सुमन शाह
4 May 2021
समय चक्र
रात चाहे जितनी घनी और लम्बी हो इक सवेरा लेकर आती है ये ही है समय का चक्र , यही है जिन्दगी..सुमन
4 Apr 2020
Pyar
Love is life
2 Apr 2020
Unspoken words
Ruhaani
1 Apr 2020
I'm Ruhaani, I'm bringing my hindi poem collection for you,
It's my first podcast, poem's name "A Flower" Hopefully looking forward, plz like and comment so I can improve to myself
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