तुम्हारा पेट भरा था
इसलिए तुम बुद्ध हुए
अन्यथा तुम मजदूर होते !
तुम्हारा पेट भरा था
इसलिए तुम बुद्ध हुए
अन्यथा तुम मजदूर होते ! - उमेश स्वामी 'यायावर'
14 Sept 2023
हिंदी दिवस विशेष : हिंदी वाली मैडम की कविता ' मैं और मेरी हिंदी'
छोटी उम्र के सपने का
सपने में अनुवाद हो गया,
मातृभाषा में देखे जाने वाले सपने पर भी
तुम्हारा ही राज हो गया!
13 Aug 2023
और इस तरह कृष्ण- सुदामा की दोस्ती की लाज बच गई!
मीडिया के कृष्ण - सुदामा की दोस्ती की कहानी
13 Jul 2023
टॉर्च बेचने वाले
यह हरिशंकर परसाई जी की कहानी है। इसमें परसाई जी ने आस्थाओं के बाजारीकरण और धार्मिक पाखंड पर प्रहार किया है।
2 May 2023
सौ जूते भी खाए और सौ प्याज़ भी
सौ जूते और सौ प्याज़ वाली कहावत तो पुरानी है, लेकिन आज भी प्रासंगिक है!
26 Feb 2023
हस्तक्षेप : मगध की शांति भंग नहीं होनी चाहिए
श्रीकांत वर्मा की कविता 'हस्तक्षेप' सरकारी स्कूलों के 11वीं कक्षा में पढ़ाई जाती है।
16 Feb 2023
चीते की सीख ..!
मनुष्य अपने जल्लादों के सामने नतमस्तक हो जाते हैं और अपने वफादार और हमदर्दों का तिरस्कार करते हैं।
11 Jan 2023
जोशीमठ के पहाड़
जोशीमठ के पहाड़, शिवप्रसाद जोशी की कविता
30 Dec 2022
राजा तो नंगा है!
चाटुकारों से घिरा राजा/ शासक दम्भी हो जाता है।
3 Dec 2022
डॉ राजेंद्र प्रसाद से जुड़े किस्से
अधिवक्ता दिवस पर बात उस अधिवक्ता की जो देश का प्रथम राष्ट्रपति बना। पॉडकास्ट के इस एडिशन में डॉ राजेंद्र प्रसाद से जुड़े किस्से
27 Nov 2022
गिनकर जूते मारने की कला
ये गिनकर पचास जूते मारने की कला केवल इलाहाबादियों को ही आती है! अब आप पूछेंगे कि ये क्या बकैती है, जूता भी कोई गिनकर मारता है क्या ? तो सुनिये एक इलाहाबादी किस्सा जो मेरे एक वरिष्ठ ने मुझे सुनाया था ..
13 Aug 2022
पुलिस कहाँ है ? कहाँ है पुलिस ?
पार्टी सदस्यों के लिए, कहीं भी पुलिस नहीं है! - कॉमरेड रादेक का व्यंग।
18 Jun 2022
सुनो कहानी : जूता और प्याज़
जब वज़ीर को सज़ा के तौर पर 100 जूता और 100 प्याज़ दोनों खाने पड़े 😊
4 May 2021
हमारी फितरत
एक चील ने पहले एक साँप को फिर एक मेंढक को अपने पंजों में दबोच लिया। चील दोनों को पंजों में दबोचे हुए आसमान में उड़ने लगी। चील जब तक ऊँचाई पर पहुँचती तब तक साँप और मेंढक दोनों चील के पंजों में सहज हो चुके थे।
साँप ने देखा सामने पास ही में एक मेंढक है। साँप मेंढक को निगलने के लिए लपका। उधर मेंढक ने देखा कि बगल में एक साँप है और उसकी तरफ झपट रहा है। साँप को झपटते देख मेंढक दूसरी तरफ छलाँग मारकर उससे बचने की कोशिश करने लगा। मौत के पंजों में दबे साँप और मेंढक की फितरत देख चील मुस्कराने लगी।
चील आज भी मुस्करा रही होगी।
18 Apr 2021
अलेक्जेंडर रस्किन की कहानी - पापा जब बच्चे थे
एक खूबसूरत कहानी.. खूबसूरत संदेश के साथ कि व्यक्ति को एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिए।
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