वो अपने घर चला गया अफ़्सोस मत करो
इतना ही उस का साथ था अफ़्सोस मत करो
इंसान अपने आप में मजबूर है बहुत
कोई नहीं है बेवफ़ा अफ़्सोस मत करो
इस बार तुम को आने में कुछ देर हो गई
थक-हार के वो सो गया अफ़्सोस मत करो
दुनिया में और चाहने वाले भी हैं बहुत
जो होना था वो हो गया अफ़्सोस मत करो
इस ज़िंदगी के मुझ पे कई क़र्ज़ हैं मगर
मैं जल्द लौट आऊँगा अफ़्सोस मत करो
ये देखो फिर से आ गईं फूलों पे तितलियाँ
इक रोज़ वो भी आएगा अफ़्सोस मत करो
वो तुम से आज दूर है कल पास आएगा
फिर से ख़ुदा मिलाएगा अफ़्सोस मत करो
बे-कार जी पे बोझ लिए फिर रहे हो तुम
दिल है तुम्हारा फूल सा अफ़्सोस मत करो
बशीर बद्र ||
18 Mar 2024
Usse Achha Nahi Lagta
23 Dec 2023
भरे हुए जाम पर सुराही का सर झुका
ज़ुबैर अली ताबिश (https://www.rekhta.org/poets/zubair-ali-tabish/ghazals?lang=hi)
5 Nov 2023
Numb
english poetry
4 Nov 2023
chaand sitaare phool parinde
चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़
सारी दुनिया उसका चर्बा उसका चेहरा एक तरफ़
वो लड़कर भी सो जाए तो उसका माथा चूमूँ मैं
उससे मुहब्बत एक तरफ़ है उससे झगड़ा एक तरफ़
जिस शय पर वो उँगली रख दे उसको वो दिलवानी है
उसकी ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़
ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उसके हाथों से
चारासाज़ी एक तरफ़ है उसका छूना एक तरफ़
सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है
सब का कहना एक तरफ़ है उसका कहना एक तरफ़
उसने सारी दुनिया माँगी मैंने उसको माँगा है
उसके सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़ !!
1 Sept 2023
Kiye Jo Vaade Unhe
Nazm/Poetry
1 Sept 2023
मैं तुझसे प्रीत लगा बैठा -उदयभानु ‘हंस’
Poetry.
25 Aug 2023
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे
वसीम बरेलवी
25 Aug 2023
Dil Jalane Ki Baat
-जावेद क़ुरैशी
10 Aug 2023
Pyar ka Pehla Khat
nazm
9 Jul 2023
आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो- जाँ निसार अख़्तर
ग़ज़लें
2 Jul 2023
Dosti Wala Pyar-Wasim Akaram
short story...
2 Jul 2023
मुझे अब डर नहीं लगता-मोहसिन नक़वी
किसी के दूर जाने से
तअ'ल्लुक़ टूट जाने से
किसी के मान जाने से
किसी के रूठ जाने से
मुझे अब डर नहीं लगता
किसी को आज़माने से
किसी के आज़माने से
किसी को याद रखने से
किसी को भूल जाने से
मुझे अब डर नहीं लगता
किसी को छोड़ देने से
किसी के छोड़ जाने से
ना शम्अ' को जलाने से
ना शम्अ' को बुझाने से
मुझे अब डर नहीं लगता
अकेले मुस्कुराने से
कभी आँसू बहाने से
ना इस सारे ज़माने से
हक़ीक़त से फ़साने से
मुझे अब डर नहीं लगता
किसी की ना-रसाई से
किसी की पारसाई से
किसी की बेवफ़ाई से
किसी दुख इंतिहाई से
मुझे अब डर नहीं लगता
ना तो इस पार रहने से
ना तो उस पार रहने से
ना अपनी ज़िंदगानी से
ना इक दिन मौत आने से
मुझे अब डर नहीं लगता
9 Jun 2023
nazm..nida fazli
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
इधर उधर कई मंज़िल हैं चल सको तो चलो
बने बनाये हैं साँचे जो ढल सको तो चलो
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
मुझे गिराके अगर तुम सम्भल सको तो चलो
यही है ज़िन्दगी कुछ ख़्वाब चन्द उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
हर इक सफ़र को है महफ़ूस रास्तों की तलाश
हिफ़ाज़तों की रिवायत बदल सको तो चलो
कहीं नहीं कोई सूरज, धुआँ धुआँ है फ़िज़ा
ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो
3 Jun 2022
Tumhare Seher Ka Mausam
BY क़ैसर-उल जाफ़री (https://www.rekhta.org/poets/qaisarul-jafri/ghazals?lang=hi) !!
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