12: मोदी 2.0.1- ‘मुस्लिम विरोध’ का ग्रीन जोन, सियासी लॉकडाउन में लिबरल
मोदी-2.0 का पहला साल बीतते-बीतते मुस्लिम विरोध का धागा बेहद मजबूत हो चुका है. इतना मजबूत कि सियासी आसमान में लहराती बीजेपी की पतंग से फिलहाल कोई पॉलिटिकल पार्टी पेंच लड़ाती नहीं दिखती.
सुनिए क्विंट के नीरज गुप्ता का ये पॉडकास्ट जिस में वो बता रहे हैं कथा जोर गरम है कि... मोदी सरकार की दूसरी पारी के पहलेसाल में देश में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ माहौल काफी गरम हुआ है. जिसकी झलक दिल्ली चुनावों की कैंपेन में, तब्लीगी जमात के बहाने मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने में, मुसलमानों के खिलाफ फेक न्यूज के जाल और यहां तक कि निशाने पर आई फैज अहमद फैज की नज्म तक में देखी जा सकती है.
30 May 2020
11: मजदूरों को घर वापसी के लिए महज ट्रेन और टिकट नहीं, सम्मान भी दीजिए
भारत देश के लाखों मजदूर महानगरों की चमचमाती गाड़ी के वो पहिए हैं जिनकी किस्मत में भले ही सड़क पर घिसना लिखा हो पर गाड़ी उनके बिना चल नहीं सकती. लेकिन जब कोरोना महामारी के दौर में इनकी घर वापसी का सवाल आया तो हमारे सिस्टम ने इन्हें शरीर के किसी सड़े हुए अंग की तरह अलग-थलग कर दिया.
सुनिए क्विंट के नीरज गुप्ता का ये पॉडकास्ट जिस में वो बता रहे हैं कि कथा जोर गरम है कि... प्रवासी मजदूरों को वापस उनके घर को भेजने का सरकार का फैसला अचकचाहट और हड़बड़ी से भरा है.
26 Apr 2020
10: Coronavirus के बीच मुख्यमंत्रियों ने केंद्र को दिखाई ‘संघवाद’ की ताकत
लगातार बढ़ते एक्टिव केस, हांफता हुआ मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, अचेत अर्थव्यवस्था, भविष्य पर छाई अंदेशे की धुंध, ‘लॉकडाउन’ की अदृश्य दीवारें और नौकरियों पर लटकती तलवारें. भारत में कोरोना वायरस के असर को अगर चंद शब्दों में बयां करना हो तो वो चंद शब्द कुछ ऐसे ही होंगे. डरावने और उदास. लेकिन इन सब के बीच एक पहलू है, जिसे इन नकारात्मक परिस्थितियों में भी अपनी अहमियत दिखाने का एक सकारात्मक मौका मिला है. और वो है- देश का संघीय ढांचा यानी फेडरल स्ट्रक्चर.
26 Apr 2020
9: Coronavirus के बीच मुख्यमंत्रियों ने केंद्र को दिखाई ‘संघवाद’ की ताकत
लगातार बढ़ते एक्टिव केस, हांफता हुआ मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, अचेत अर्थव्यवस्था, भविष्य पर छाई अंदेशे की धुंध, ‘लॉकडाउन’ की अदृश्य दीवारें और नौकरियों पर लटकती तलवारें. भारत में कोरोना वायरस के असर को अगर चंद शब्दों में बयां करना हो तो वो चंद शब्द कुछ ऐसे ही होंगे. डरावने और उदास. लेकिन इन सब के बीच एक पहलू है, जिसे इन नकारात्मक परिस्थितियों में भी अपनी अहमियत दिखाने का एक सकारात्मक मौका मिला है. और वो है- देश का संघीय ढांचा यानी फेडरल स्ट्रक्चर.
26 Apr 2020
8: COVID-19 Lockdown: Shelter Home में फंसे लोगों की दिक्कतें मिटाएंगे साधु-मौलवी?
केंद्र सरकार का दावा है कि उसने एक राज्य से दूसरे राज्य में हो रहे पलायन पर पूरी तरह रोक लगा दी है. ये दावा हजारों-लाखों प्रवासी मजदूरों के बारे में है. वो कामगार जो कोरोना वायरस के लॉकडाउन के बीच अपनी और अपने परिवार की जान हथेली पर रखकर अपने घरों की तरफ निकल पड़े थे. केंद्र सरकार ने ये दावा सुप्रीम कोर्ट में किया जो प्रवासी मजदूरों की देखभाल से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही है. अगर केंद्र की बात को सही मान भी लिया जाए तो भी एक कहावत याद आती है- अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत.
29 Mar 2020
7: COVID19 से निपटने के लिए दक्षिण से क्या सीखें उत्तर भारत के राज्य?
कोरोनावायरस के एक्टिव केसिस और उसके असर से मरने वालों की तादाद दिन-ब-दिन बढ़ रही है. देश भर में लॉकडाउन है. दूध-सब्जी-राशन जैसी बुनियादी चीजों की स्पलाई को लेकर लोगों में घबराहट है. और इस महामारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर उत्तर भारतीय राज्य दक्षिण भारतीय राज्यों से कहीं पीछे हैं.
कथा जोर गरम है कि...
सदी की सबसे बड़ी महामारी कोरोनावायरस से निपटने के लिए हिंदी पट्टी के नॉर्थ इंडियन राज्य जहां थाली और ताली के भाषण में उलझे हैं वहीं साउथ इंडियन स्टेट्स में ‘नो भाषण, ओनली एक्शन’ का जोर दिख रहा है.
17 Mar 2020
6: कोरोनावायरस ने टाला कमलनाथ का फ्लोर टेस्ट,लेकिन सियासी संकट बरकरार
वो दिन गए जब सरकारें चुनाव से बनती थीं. अब वो जोड़तोड़ से बनती हैं. चुनाव में बहुमत किसी भी पार्टी को मिले लेकिन नेताओं की मौकापरस्ती, पैसे का खेल और दलबदल कानून की बेचारगी मिलकर तय करते हैं कि सत्ता किस पार्टी के पास रहेगी.
आप बिलकुल ठीक समझे. मैं बात कर रहा हूं मध्य प्रदेश की जहां करीब 15 महीने पहले सरकार बनाने वाले कमलनाथ कोरोनावयरस के सहारे फ्लोर टेस्ट का इम्तेहान टाल रहे हैं और कुर्सी की जंग एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है.
कथा जोर गरम है कि...
मध्य प्रदेश में विधानसभा सत्र भले ही दस दिन के टल गया लेकिन कांग्रेस सरकार के सिर पर लटक रही तलवार अब भी बरकरार है. बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आरोप है कि कमलनाथ सरकार फ्लोर टेस्ट का सामना करने के बजाए भाग खड़ी हुई.
सुनिए कथा जोर गरम नीरज गुप्ता के साथ.
12 Mar 2020
5: Jyotiraditya Scindia जैसे नेताओं को रोकने के लिए Congress को चाहिए सत्ता का फेविकोल
सिंधिया राजघराने के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी क्या छोड़ी, सियासी गलियारों में फिर फुसफुसाहट होने लगी- जब-जब सत्ता छूटती है, तब-तब कांग्रेस टूटती है.
बात तो सही है. पिछले 6 साल में केंद्र की राजनीति पर बीजेपी के वर्चस्व के बाद से कांग्रेस के दर्जनों दिग्गज पार्टी को विदा कह चुके हैं. खास बात ये कि उनमें से कुछ ने अपना अलग रास्ता चुना लेकिन ज्यादातर को सियासत की चिलचिलाती गरमी में बीजेपी के आंचल की छांव ही बेहतर लगी.
कथा जोर गरम है कि...
135 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी के जोड़ एक बार फिर चरमरा रहे हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे ने कांग्रेस के भीतर की कुनमुनाहट को सतह पर ला दिया है और आने वाले दिनों में पार्टी को कई और नेताओं की नाराजगी से रूबरू होना पड़ सकता है.
28 Feb 2020
4: Delhi Violence: देश की राजधानी में हिंसा का तांडव, ओछी सियासत कर रही सरकारें
ये शहर दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच कोलैट्रल डैमेज का शिकार हो गया है. जैसे दो हाथियों की लड़ाई में घास कोलैट्रल डैमेज का शिकार हो जाती है.हालिया चुनावों के बाद दिल्ली में भड़की हिंसा ने एक बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है- दिल्ली को चला कौन रहा है, केजरीवाल, केंद्र या फिर ऊपर वाला?
इस सब के बारे में सुनिए क्विंट हिंदी के एग्जीक्यूटिव एडिटर नीरज गुप्ता से कथा जोर गरम में.
12 Feb 2020
3: Delhi Election Result: नतीजों ने बढ़ाया Arvind Kejriwal का कद, क्या है आगे का गेमप्लान? Quint Hindi
साल 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही विपक्ष एक ऐसे नेता की तलाश में है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बरक्स एक वैकल्पिक आवाज बन सके. दिल्ली के दंगल में अरविंद केजरीवाल की बंपर जीत के बाद अब सियासी गलियारों में कथा जोर गरम है कि क्या केजरीवाल नेशनल लेवल पर बीजेपी की वैकल्पिक आवाज बनने की तरफ बढ़ेंगे?
जानिए नीरज गुप्ता से.
7 Feb 2020
2: शाहीन बाग,बुलेट,बिरयानी,पाकिस्तान- योगी जी के भाषणों में पैटर्न है
शाहीन बाग.. बिरयानी.. कश्मीर .. 370.. ‘बोली नहीं गोली’.. राम मंदिर.. राष्ट्रभक्ति, आतंकवाद.. मजहब.. तीन तलाक.. पाकिस्तान वगैरह वगैरह.. साहब.. ये चुनावी रैली है या किसी एक समुदाय के खिलाफ किसी दूसरे समुदाय को युद्ध के लिए प्रेरित करने का कोई भाषण? ताज्जुब है कि गेरुआ वस्त्र वाला एक योगी चुनाव प्रचार के अपने ओजस्वी भाषणों में इस तरह की वाणी का इस्तेमाल करता है.
कथा जोर गरम है कि...
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ इन दिनों दिल्ली में धुआंधार प्रचार रैलियां कर रहे हैं. हो भी क्यों ना? आखिरकार बीजेपी के स्टार प्रचारक हैं. लेकिन खास बात ये है कि उनके भाषणों का प्रिय विषय है- शाहीन बाग
इस एपिसोड में समझिये योगी आदित्यनाथ के चुनावी भाषण में इस्तेमाल हो रहे शब्दों का मतलब नीरज गुप्ता से.
3 Sept 2018
1: Listen: Why is The Govt Tightening Grip Over WhatsApp?
Apparently a smartphone and internet connection isn’t enough to create WhatsApp group.
Katha Jor Garam is that the government is extremely concerned about propaganda on WhatsApp. Recently, the DM and SP of Uttar Pradesh’s Lalitpur district have issued an order saying that the admin of every WhatsApp group for journalists will have to be registered with the district’s information department.
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Does not typically book guests
Based on episode analysis; this does not confirm that the show is currently accepting guests.
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