पद्य सागर - A Poetry Podcast Series
इस सीरीज के माध्यम से हम लोग आप तक लाएंगे एक विशाल सागर रुपी हिंदी पद्य सागर की वो रचनाये जिन्होंने हिंदी साहित्य को नए आयामों तक पहुंचाया है|
Poetry Podcast Series
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काव्य रचना - ये उसका शौक है यारों सभी से दिल्लगी करना
लेखक - बालस्वरुप राही
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बालस्वारूप राही जी का जन्म 4 मई 1936 में दिल्ली के टिमारपुर गांव में हुआ। राही जी को संभवतः लोग उनकी बाल कविताओं के लिए अधिक जानते होंगे जैसे गांधीजी के बन्दर तीन, सूरज का रथ, ऊट, रंग जमाया टीवी ने और भी काफी सारी। राही जी की किताबों में आते है गीत संग्रह जैसे मेरा रूप तुम्हारा दर्पण, जो नितांत मेरी है बाल गीत संग्रह जैसे दादी अम्मा मुझे बताओ, जब हम बड़े होंगे, हम सबसे आगे निकलेंगे, सूरज का रथ और उनका ग़ज़ल संग्रह राही को समझाए कौन प्रकाशित हुए।
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2 Jun 2020
पद्य सागर || भाग 8
काव्य रचना - एक मुलाकात
लेखक - साहिर लुधियानवी
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साहिर लुधियानवी जी एक सुप्रसिद्ध शायर और हिंदी फिल्मों में गीतकार थे। आपने अनेको सदाबाहर गीतों को लिखा जो हमेशा के लिए अमर हो गए। अपने समकालीन शायरों की तुलना में साहिर का ग़ज़ल कहने का लहज़ा कुछ विशेष था। साहिर साहब को पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया। साहिर लुध्यानवी की मुख्या कृतियाँ है - तल्खियाँ (नज़्मे) , परछाइयाँ (ग़ज़ल संग्रह)।
29 May 2020
पद्य सागर || भाग 7
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काव्य रचना - उस रूप को बांध सकूं, ऐसी कविताई दे
लेखक - चंद्रसेन विराट
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चंद्रसेन विराट गीत ग़ज़ल के एक बड़े नामों में शामिल वो नाम है जिनके शब्दों और उनके अर्थो में गहरा अर्थ होता है। इंदौर में जन्में कवि विराट जब मंच पर खड़े हो एक हाथ में पर्ची और दूसरे हाथ की उंगलियों को नचाते हुए जब कविता पाठ करते थे तो जो ही अद्भुत दृश्य बनता था कि सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह पाते थे। विराट की ने दुष्यंत जी द्वारा लाई गई हिन्दी ग़ज़लों को नया स्वरूप प्रदान करना चाहा जिसमें वे सफल भी हुए। विराट जी कई काव्य संग्रह भी प्रकाशित हुए।
26 May 2020
पद्य सागर || भाग 6
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काव्य रचना - सूना घर
लेखक - दुष्यंत कुमार
दुष्यंत कुमार त्यागी उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले थे। स्वभाव से मनमौजी दुष्यंत ने अपनी प्रारंभ लेखन की शुरुआत परदेशी के नाम से की थी। समकालीन में आम लोगों के लिए जहां मुक्तिबोध और अज्ञेय की रचनाओं को समझना मुश्किल हो रहा था। तो उनके लिए बचे तो नागाअर्जुन और धूमिल ही। इसी समय दुष्यंत ने युवा अवस्था में ही अपनी ख्याति अर्जित की। अपनी आक्रोशित और सहज भाषा से उन्होंने उस समय हो रहे आंदोलनों को नया रूप दिया। सरकारी नौकरी में होते हुए भी उन्होंने अनेकों बार सरकार और इंदिरा जी पर तीर चलाए। जिसके लिए उन्हें कई बार तलब भी करा गया। दुष्यंत जी के नाम पर ही दुष्यंत कुमार सम्मान भी प्रारंभ किया गया। उनकी प्रमुख कृतियां है - सूर्य का स्वागत, आवाज़ों के घेरे, जलते हुए वसंत, साए में धूप।
22 May 2020
पद्य सागर || भाग 5
पद्य सागर || भाग 5
काव्य रचना - शेर और गज़ले
लेखक - अकबर इलाहाबादी
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सय्यद अकबर हुसैन रिज़वी जो अकबर इलाहाबादी के नाम से मशहूर हुए। उन्हें उर्दू में हास्य - व्यंग्य का सबसे बड़ा शायर माना जाता है। अकबर पेशे से इलाहाबाद में सेशन जज थे। वे उर्दू ज़बान के सख़्त लहज़े के साथ अंग्रेजी के शब्दों के प्रयोग से अपनी ग़ज़लों और शेरो में नई रोचकता ले आये। अपनी साहित्यिक समझ के कारण उन्हें लिसन-उल-असर से भी नवाज़ा गया।
22 May 2020
पद्य सागर || भाग 4
पद्य सागर || भाग 4
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काव्य रचना - गाएंगे, गाएंगे हम वंदे मातरम्
लेखक - डॉ उर्मिलेश शंखधर
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डॉ उर्मिलेश शंखधर पद्य साहित्य में हिंदी गीतों के पर्यायवाची के रूप में जाने जाते है। उर्मिलेश जी अपने अद्वितीय व्यक्तिक्तव, और ओजस्वी कविताओं के लिए सदा जाने जाते रहेंगे। उर्मिलेश जी ने न केवल गीत लिखे अपितु अनेक ग़ज़लें भी लिखी जिनमें जीवन दर्शन के कई रूप हमें मिलते है। उनकी प्रतिभा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
22 May 2020
पद्य सागर || भाग 3
पद्य सागर || भाग 3
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काव्य रचना - कदंब की डाली
लेखक - सुभद्रा कुमारी चौहान
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यू तो सुभद्रा कुमारी चौहान जी अपनी कविता झांसी की रानी के लिए आमजन में जानी जाती है, लेकिन इसके अलावा भी ऐसी कई रचनाएं जैसे मुकुल (कविता संग्रह), बिखरे मोती (कहानी संग्रह), सीधे सादे चित्र, और त्रिधारा रचनाओं की वजह से आप हिंदी साहित्य के पाठकों में प्रसिद्ध है। सुभद्रा कुमारी जी एक सुप्रसिद्ध कवियित्री के साथ ही स्वतंत्रता सेनानी भी थी। अपने अल्प जीवन काल में ही सुभद्रा जी ने ऐसे पद्यो की रचना की जो आज भी उतने ही प्रासंगिक है जितने उस समय होते थे।
22 May 2020
पद्य सागर || भाग 2
पद्य सागर || भाग 2
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काव्य रचना- मधुशाला
लेखक - हरिवंश राय बच्चन
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मधुशाला उन रचनाओं में से है जो निर्विवाद रूप से हिन्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय काव्य कृति रही है। लोकप्रियता के साथ ही ये काव्य साहित्यिक मूल्यों की रक्षा, एवं प्रतीकों का भंडार लिए हुए है। यह ऐसी सृजनात्मक ऊर्जा है जो इतनी लंबी अवधि तक अपने पाठकों तथा जन समुदायों को अभिभूत किए हुए है। इस कविता का रचनाकाल 1933-34 का बताया जाता रहा है। मधुकाव्य एक ऐसी काव्यकृति है जिसमें धार्मिक संकीर्णता, साम्प्रदायिकता, जात-पात, छुआ छूत जैसी सामाजिक समस्याओं के गीतात्मक समाधान कवि ने बताए है। इसके साथ ही बच्चन जी। ने व्यक्ति मन की ऐसी अभिलाषाओं को भी शब्द में ढाला है जो पढ़ने वालो को पूर्ण निजी लगती है। काव्यात्मक उत्कर्ष की दृष्टि से इस गीत को बच्चन जी के श्रेष्ठतम गीतों में रखा जाता है। 135 रूबाइयों में से प्रासंगिक कुछ 9 रूबाइयां आज मैंने आपको सुनाई है।
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आपकी प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद।
20 May 2020
पद्य सागर || भाग 1
पद्य सागर || A Poetry Podcast Series
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काव्य रचना - रश्मिरथी (तृतीय सर्ग)
लेखक - रामधारी सिंह दिनकर
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